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Thursday, 7 September 2017

गुप्तोतर काल by bajrang Lal

            गुप्तोत्तर काल


 छठी शताब्दी के मध्य तक गुप्त साम्राज्य पूर्णतः  विभक्त  हो गया और उत्तर भारत फिर  अनेक राज्यों में बंट गया ।


(1)  वल्लभी में मैत्रक वंश , (2)  पंजाब में हुणों का शासन  (3) कन्नौज में मौखरि वंश (4) मालवा में यशोवर्मन

 वर्ध्दन  राजवंश ( पुष्यभूति वंश)


 पुष्यभूति -- इस  वंश का संस्थापक था , इसने थानेसर में इस वंश की स्थापना की ।




प्रभाकरवर्ध्दन   ---यह वर्ध्दन वंश की शक्ति और प्रतिष्ठा का संस्थापक था ।


 प्रभाकरवर्ध्दन  की पत्नी यशोमती से 2 पुत्र राज्यवर्धन एवं हर्षवर्धन तथा एक कन्या राज्यश्री उत्पन्न हुई ।

 राज्यश्री का विवाह कन्नौज के मौखरि नरेश ग्रहवर्मन से हुआ ।




राज्यवर्ध्दन --  अपने पिता की मृत्यु के बाद राज्यवर्ध्दन  गद्दी पर बैठा ।

 इसी समय मालवा नरेश देवगुप्त ने ग्रहवर्मन की हत्या कर राज्यश्री को कैद कर लिया ।


 राज्यवर्धन ने देवगुप्त को पराजित कर दिया परंतु देवगुप्त के मित्र गौर शासक संसार ने धोखे से राज्यवर्धन की हत्या कर दी ।



 हर्षवर्धन

हर्षवर्धन वर्धन वंश का शक्तिशाली एवं  यशस्वी सम्राट था मात्र 16 वर्ष की आयु में वह एक विकट परिस्थितियों में गद्दी पर बैठा ।

 वह अपने को राजपुत्र कहता था , तथा उसने अपना नाम शिलादित्य रखा ।

 हर्ष ने अपने आचार्य दिवाकरमित्र की सहायता से राज्यश्री को खोज निकाला ।

 हर्ष ने कन्नौज को अपनी राजधानी बनाया ।

हर्ष  को पूर्वी भारत में गौड़  देश के शैव राजा शंशाक  से मुकाबला करना पड़ा ।

 619 ईस्वी में शंशाक  की मृत्यु हुई तब यह  शत्रुता समाप्त हुई ।

 दक्षिण की  ओर हर्ष के अभियान को नर्मदा के किनारे चालुक्य वंश के राजा पुलकेशिन द्वितीय ने रोका और हर्ष को पराजित किया ।


 हर्ष के समकालीन शासक

भास्कर वर्मा

पुलकेशिन द्वितीय

गौड़ नरेश शंशाक

  ध्रुवसेन द्वितीय

 चीनी यात्री हेनसांग हर्ष के समय भारत आया था ।

 हेनसांग ने शूद्रों को कृषक कहा था ।

 हेनसांग  को यात्रियों का राजकुमार  , नीति का पंडित एवं वर्तमान शाक्यमुनि कहा गया है ।

  हर्ष ने बौद्ध धर्म की महायान शाखा को अपना सरंक्षण प्रदान किया ।

 बाणभट्ट ने हर्षचरित एवं कादंबरी की रचना की ।

 मयूर ने सूर्यशतक की रचना की ।

भारत की मिट्टियाँ by bajrang Lal

           भारत की मिट्टियां


 मृदा के अध्ययन को मृदा विज्ञान ( pedology )  कहते हैं ।

मर्दा जनन एक जटिल तथा निरंतर होने वाली प्रक्रिया है ।


 भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ( ICAR )  ने 1986 में देश में आठ प्रमुख मिट्टियों की पहचान की है ।



 जलोढ़ मृदा _---------------------  46%

काली मृदा -----------------------   20%

 लाल मृदा  ------------------------18 %

लेटराइट मृदा ---------------------- 3.70%

मरुस्थलीय मृदा _--------------------- 4%

पर्वतीय मृदा ------------------------------- 5.5%

भूसर एवं भूरी मृदा

हिम क्षेत्र. ----------------------------------- 1.20%



 जलोढ़ मिट्टी

जलोढ़ मिट्टियाँ  विशाल मैदानों  , नर्मदा , ताप्ती , गोदावरी , महानदी , कृष्णा , कावेरी की घाटियों में एवं केरल के तटवर्ती भागों में पाई जाती है ।


  शोर्ट ट्रिक --- कृष्ण का जल में गोता खाने का मन किया

 कृष्ण -- कृष्णा नदी
 जल --- जलोढ़ मिट्टी
गो ---- गोदावरी नदी
 ता --- ताप्ती नदी
म ----  महानदी
न ----  नर्मदा नदी
किया ---  केरल


 यह मिट्टियां नदियों द्वारा अपरदित पदार्थों से निर्मित है।


 इसमें पोटास तथा कैल्शियम की प्रचुरता तथा नाइट्रोजन एवं ह्यूमस की कमी पाई जाती है ।
,
 यह मिट्टी धान ,  गेहूं , तिलहन , गन्ना , दलहन , अादि की खेती के लिए उत्तम है ।


  शोर्ट ट्रिक ------  गधा खाए तिल की गेंद

  ग---  गन्ना
 धा ---  धान
तिल ---- तिल
 गे ---    गेहूं
द ---  दलहन






 काली मिट्टी

काली मिट्टी का विकास महाराष्ट्र , पश्चिमी मध्य प्रदेश , गुजरात , राजस्थान , आंध्र प्रदेश , तमिलनाडु में दक्कन लावा के अपक्षय से हुआ है ।

शोर्ट ट्रिक ----- आप गुमराह मत करो

 आप  --- आंध्र प्रदेश
 गु ---  गुजरात
  म ---  मध्य प्रदेश
  रा ---  राजस्थान
म --- महाराष्ट्र
त ---  तमिलनाडु





 इसे स्थानीय रूप से रेगुर या काली कपास की मिट्टी कहते हैं तथा अंतरराष्ट्रीय रूप से उष्ण कटिबंधीय चरनोजम कहा जाता है ।


 यह मिट्टियां लौह तत्व , कैल्शियम , पोटाश , एलुमिनियम तथा मैग्नीशियम कार्बोनेट से समृद्धि एवं नाइट्रोजन , फास्फोरस और जैविक पदार्थ की कमी होती है ।


 इस मिट्टी में नमी धारण करने की क्षमता अधिक होती है जो गीली होने पर चिपचिपी एवं सुखने पर  इसमें दरारें  उत्पन्न हो जाती है ।


 इनमें उर्वरता अधिक होती है ।

यह मिट्टी कपास , तूर , तंबाकू , मोटे अनाज एवं अलसी की खेती के लिए उपयुक्त हो रहती है ।

शोर्ट ट्रिक -- मोटा आलसी तू पास तो आ

   पास----------   कपास
आलसी ------------- अलसी
मोटा -------------- मोटा अनाज
तू -------------- तूर
तो----------- तन्बाकू




 लाल मिट्टी

 यह मिट्टी तमिलनाडु , कर्नाटक , महाराष्ट्र , आंध्र प्रदेश , उड़ीसा , झारखंड के व्यापक क्षेत्र में पाई जाती  है ।

शोर्ट ट्रिक -----  उड़ीसा तक आप झाम पाओगे।

आप ------ आन्ध्र प्रदेश
उड़ीसा  ----- उड़ीसा
त ---------- तमिलनाडु
क ---------- कर्नाटक
झा ----------- झारखण्ड
म ----------- महाराष्ट्र



 यह ग्रेनाइट एवं नीस चट्टानों के  विखंडन एवं वियोजन से बनी है ।

 इसका लाल रंग लोहे के आक्साइड की उपस्थिति के कारण होता है ।



 इस मिट्टी में लोह तत्व  एवं एलुमिनियम अधिक होता है किंतु जीवनांश पदार्थ और नाइट्रोजन एवं फास्फोरस की कमी पाई जाती है ।


 यह अत्यधिक निक्षालित मिट्टियां है ।


यह बाजरे जैसी खाद्यान्न फसलों के लिए उपयुक्त होती हैं ।




 लेटराइट मिट्टी

भारत में यह मिट्टी मेघालय पठार ,  पश्चिमी तथा पूर्वी घाट के क्षेत्रों में पाई जाती है ।

 इनका स्वरूप एक जैसा होता है  , भीगने पर यह कोमल एवं सूखने पर कठोर हो जाती है ।


 यह मिट्टियां लौह एवं एलुमिनियम से समृद्ध किंतु नाइट्रोजन , पोटाश , पोटेशियम , चूना  एवं जैविक पदार्थ की कमी होती है ।


इनकी उर्वरता कम होती है , परन्तु उर्वरक के उपयोग से काजू जैसी फसलें उगाई जा सकती है ।




 पर्वतीय मिट्टी


 यह मुख्यतः हिमालय , पश्चिमी घाट , पूर्वी घाट एवं  प्रायद्वीपीय भारत की अन्य पर्वत श्रेणियों पर पाई जाती है ।


 इसमें इनमें जीवांस की अधिकता एवं पोटाश   , फास्फोरस  एवं चुना की कमी पाई जाती है ।


 यह मिट्टी चाय , कहवा , मसाला तथा फलों के उत्पादन के लिए उपयुक्त है ।


शोर्ट ट्रिक ----- कच्चा मसाला पर्वत पर नहीं फैल सकता ।

क ------------- कहवा
चा ------------ चाय
मसाला -------- मसाला
पर्वत ---------- पर्वतीय मिट्टी
फैल -------- फल


 मरुस्थलीय मिट्टी


मरुस्थलीय मिट्टी का विस्तार , राजस्थान , सौराष्ट्र  ,कच्छ , हरियाणा और दक्षिणी पंजाब में है ।

शोर्ट ट्रिक --- मरुस्थल में सौ राष्ट्र का पहरा भी कम है  ।

मरुस्थल ----- मरुस्थलीय मिट्टी
सौ राष्ट्र ------------ सौराष्ट्र
प -------------- पंजाब
ह ------------   हरियाणा
रा --------_----- राजस्थान
कम ----------- कच्छ


 यह बजरी युक्त मिट्टी है जिसमें नाइट्रोजन एवं जैविक पदार्थों की कमी तथा केल्सियम कार्बोनेट की भिन्न मात्रा पाई जाती है ।


 इनमें केवल मिलेट , बाजरा , ज्वार तथा मोटे अनाज ही उगाए जाते हैं ।

शोर्ट ट्रिक --- बाजरा मिले तो मोटा हो जांवा ।

बाजरा ------------ बाजरा
मिले -------------- मिलेट
मोटा ------------ मोटा अनाज
जांवा ---------- ज्वार



 पेट एवं दलदली मृदा

यह मृदा वर्षा ऋतु में जलमग्न होने वाले क्षेत्रों में पाई जाती है ।

 यह मिट्टियां काली भारी एवं अत्यधिक अम्लीय  होती है ,  धान की खेती के लिए उपयुक्त होती हैं ।


 यह मिट्टियां केरल में मिलती है ।



 लवणीय एवं क्षारीय मिट्टी

यह मिट्टियां पंजाब , हरियाणा , उत्तर प्रदेश तथा महाराष्ट्र के शुष्क भागों में पाई जाती है ।

शोर्ट ट्रिक -- उपमा ने हरि का पंजा लक्ष से धोया ।

उप----- उतर प्रदेश
मा ------- महाराष्ट्र
हरि ------- हरियाणा
पंजा -------- पंजाब
 लक्ष ---- लवणीय एवं क्षारीय मिट्टी

 यह रहे कलर  , उसर  राथड़ , थूर ,  चोपन स्थानीय नामों से जानी जाती है ।

 इनमें चावल , गेहूं , कपास , गन्ना , तंबाकू फसलें उगाई जाती है ।


Wednesday, 6 September 2017

प्राकृतिक वनस्पति by bajrang Lal

प्राकृतिक वनस्पति

 भारत में निम्न प्रकार की वनस्पति पाई जाती है---

 (1) उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन

(2) उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन

(3) उष्णकटिबंधीय घास के मैदान

(4) शुष्क मरुस्थलीय कांटेदार वनस्पति

 (5) डेल्टाई वन ( मैंग्रोव वन )

 (6) पर्वतीय वन


   

              उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन

 यह वन भारत के उन भागों में पाए जाते हैं  , जहां 200 सेमी से अधिक वर्षा एवं 24 डिग्री सेंटीग्रेड से अधिक तापमान पाया जाता है ।


  इन वनों में सर्वाधिक जैव विविधता पाई जाती है ।

 यह वन पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल , लक्षद्वीप , अंडमान निकोबार दीप  ,असम के ऊपरी भाग और तमिलनाडु के तट तक सीमित है ।

शोर्ट ट्रिक -- अंडा सदा तलकर खाने से ही असर होता है ।

अंडा ---------- अंडमान निकोबार दीप
त-------- तमिलनाडु
ल --------- लक्षदीप
असर --------असम


 इन वनों में  एबोनी , महोगनी ,  रोजवुड  ,रबड़  और सिंकोना पाए जाते हैं ।

शोर्ट ट्रिक --- रोज एेसे ही रब से मोह करो ।

रोज---- रोजवुड
ऐ --------- एबोनी
से --------- सिंकोना
रब -------- रबड़
मोह -------- महोगनी

          उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन

 यह वन भारत के सबसे बड़े भाग में फैले हुए हैं , जो 100-200 सेमी वर्षा वाले क्षेत्र में पाए जाते हैं ।


 यह वन ग्रीषम ऋतु में 6 से 8 सप्ताह के लिए अपनी पत्तियां गिरा देते हैं  ।


यह वन  हिमालय के गिरीपद प्रदेशों  , झारखंड , पश्चिमी  उड़ीसा ,  छत्तीसगढ़ एवं पश्चिमी घाट के पूर्वी ढालों में पाए जाते हैं ।

शोर्ट ट्रिक ------- छंटे हुए पत्ते झाड़ू से गिरा दिए

छंटे-------- छतीसगढ़
झा ----------- झारखण्ड
ड़ू------------ उड़ीसा
गिरा दिया  -------- गिरिपद प्रदेश


 यहां पाए जाने वाले वृक्ष -- सागवान  , बाँस  , साल शीशम ,  चंदन , कुसुम , अर्जुन तथा शहतूत ।

शोर्ट ट्रिक --- अरज् किया है , बाँकू की साश शीसे ( शीसा ) में चाँदनी लगी ।

अरज् ---- अर्जुन
बाँ ------- बाँस
कू --------- कुसुम
सा ------ साल
श-------- शहतूत
शी --------- शीशम
सा--------- सागवान
चाँदनी  -------- चंदन





 उष्णकटिबंधीय घास के मैदान

यह घास के मैदान 50-100 सेमी  वर्षा वाले मैदानी भागों में पाए जाते हैं ।

 इस प्रकार की वनस्पति कर्नाटक , आंध्र प्रदेश ,  मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के पठारी भाग में पाई जाती है ।

शोर्ट ट्रिक ----- आपकी छतरी भी कम नहीं ।

आप ------- आन्ध्रप्रदेश
छतरी ------- छतीसगढ़
क----------- कर्नाटक
म ------------- मध्यप्रदेश








 शुष्क मरुस्थलीय कांटेदार वनस्पति

 जिन क्षेत्रों में 50 सेमी से कम वर्षा होती है वहाँ  इस प्रकार की वनस्पति पाई जाती है।

 भारत में ये वन राजस्थान , गुजरात , छत्तीसगढ़ , उत्तर प्रदेश और हरियाणा के अर्ध शुष्क भागों में पाए जाते हैं ।

शोर्ट ट्रिक ---  काँटे का गुच्छा उपर से हरा होता है।

गु -------- गुजरात
छा -------- छतीसगढ़
उपर ---------- उतर प्रदेश
ह ------------- हरियाणा
रा ------------- राजस्थान



 प्रमुख वृक्ष है अकासिया , खजूर , यूफोरिया , नागफनी तथा  खेजड़ा ।

शोर्ट ट्रिक ----- ज्यादा अन्न खा गए तो यू फोर खेड़ा

अ ------------- अकासिया
न ------------- नगफनी
खा  ------------- खजूर
यू फोर ---------- यूफोरबिया
खेड़ा  -------------- खेजड़ा


 डेल्टाई वन मैंग्रोव वन

 यह वनस्पति गंगा , ब्रह्मपुत्र , महानदी ,  गोदावरी , कृष्णा एवं  कावेरी नदियों के डेल्टा भागों में पाई जाती है ।


 गंगा- ब्रह्मपुत्र डेल्टा में सुंदरी वृक्ष पाए जाते हैं । ( यह क्षेत्र रॉयल बंगाल टाइगर के लिए प्रसिद्ध है )




 इन दोनों में ताड़ , कैसूरीना , नारियल  , क्योडा ,  व एंगोर के वृक्ष उगते हैं ।


शोर्ट ट्रिक ---- नारा लगाके क्यूँ  अंगारा ताकै हो

नारा ------ नारियल
क्यूँ ------- क्योड़ा
अंगारा ----- एंगोरा
ता-------- ताड़
कै --------- कैसूरीना


 और युवती हवन हवन हिमालय पर्वत पर उगते हैं ।

 उँचाई  के साथ साथ प्राकृतिक वनस्पति में अंतर भी दिखाई देता है

1500 मी तक  ----सदाबहार एवं पतझड़  वन

1500-2500  मी तक ----- शीतोष्ण कटिबन्धीय  वन

2500-4500 मी तक ------  कोणधारी  वन

 4500-4800 मी तक -------  टुण्ड्रा  वन

Tuesday, 5 September 2017

मौर्योतर काल by bajrang Lal

                 मौर्योत्तर काल


मौर्य वंश के अंतिम शासक वृहद्रथ  की हत्या करने के बाद पुष्यमित्र शुंग ने 185 ईसा पूर्व में शुंग वंश की स्थापना की ।


 शुंग वंश शुंग वंश का संस्थापक पुष्यमित्र शुंग था ।

 शुंग वंश की राजधानी विदिशा में थी ।

 पुष्यमित्र के शासनकाल की सबसे महत्वपूर्ण घटना यवनों का भारत पर आक्रमण था ।

 यवन विजय के उपलक्ष्य में पुष्यमित्र ने दो अश्वमेघ  ￶￰यज्ञ कराए ।



 कालिदास कृत माल्विकाग्निमित्रम् के अनुसार पुष्यमित्र शुंग का पौत्र वसुमित्र ने यमवनों को परास्त किया था ।

 पुष्यमित्र के पुरोहित पतंजलि ने पाणिनी की अष्टाध्यायी पर महाभाष्य की रचना की थी ।

 उससे मित्र के समय ही सांची के स्तूप का आकार दुगुना कराया गया था ।

 शुंग काल में संस्कृत भाषा एवं ब्राह्मण व्यवस्था का पुनरुत्थान हुआ  ।

इसी काल में पहला स्मृति ग्रंथ मनुस्मृति की रचना की गई ।

 शुंग वंश का अंतिम शासक देववती था ।

 इसकी हत्या 73 इससे पूर्व में उसके अमात्य वासुदेव ने कर दी तथा कण्व वंश की स्थापना की ।


     

                  कण्व वंश


 इस वंश की स्थापना वासुदेव ने की थी ।


 इस वंश के अंतिम शासक सुशर्मा था , जिसकी हत्या सातवाहन नरेश शिमुक ने कर दी और सातवाहन वंश की स्थापना की ।


                         सातवाहन वंश


 इस वंश का संस्थापक से शिमुक था  ।

उनकी राजधानी गोदावरी के तट पर प्रतिष्ठान ( औरंगाबाद )  थी ।


                 प्रमुख शासक


 शातकर्णी प्रथम -

यह इस वंश का एक महान शासक था  ,जिसने दो अश्वमेघ यज्ञ तथा एक राजसूय यज्ञ संपन्न कराएं ।



 इसने चांदी के सिक्कों पर अश्व  की आकृति अंकित  करवाई ।

 सातकर्णि ने दक्षिणापथ का स्वामी की उपाधि धारण की ।

 नाणेघाट शिलालेख में इनकी उपलब्धियों का वर्णन विस्तार से किया गया है ।




 हाल प्रथम --


 हाल सातवाहन वंश का 17 वां शासक था इसने प्राकृत ग्रंथ गाथा सप्तशती की रचना की जिसमें 700 श्लोक हैं ।


 हाल के दरबार में ही गुणाढ्य निवास करते थे जिन्होंने वृहत्तकथा की रचना की थी ।





 गौतमीपुत्र सातकर्णि प्रथम --

सातवाहन वंश का पुनरुद्धार गौतमीपुत्र के समय में हुआ ।

 उसने क्षहरात वंश का नाश किया क्योंकि उसका शत्रु नहपान इसी  वंश का था ।

उसने शकों  से मालवा और काठियावाड़ भी छीन लिया ।


 नासिक अभिलेख में गौतमीपुत्र सातकर्णि की विजय का उल्लेख है ।




 यज्ञश्री सातकर्णी  --


यह सातवाहन वंश का अंतिम शक्तिशाली शासक था जिसने सिक्कों पर मछली  , शंख एवं  जहाज अंकित करवाया ।

 सातवाहन वंश का अंतिम शासक पुलवामा चतुर्थ था ।




                 विविध तथ्य

 सातवाहनों की राजकीय भाषा प्राकृत थी  , जो कि ब्राह्मी लिपि में थी ।

 सातवाहन काल में चांदी व तांबे के सिक्कों का प्रयोग होता था जिसे कार्षापण कहा जाता था ।

 सातवाहनों ने आर्थिक लेनदेन के लिए सीसे के सिक्कों का भी प्रयोग किया ।

 सातवाहन शासकों ने ही सर्वप्रथम ब्राह्मणों को भूमि दान या जागीर देने की प्रथा शुरू की ।

 सातवाहनों में मातृसत्तात्मक सामाजिक व्यवस्था थी ।


 प्रमुख वास्तुकला  --- कार्ले का चैत्य  ,अजंता  व एलोरा की गुफाओं का निर्माण  , अमरावती एवं नागार्जुन कोंड के स्तूपों का निर्माण ।

भारत का भौगोलिक परिचय by bajrang Lal

भारत का भूगोल

भारत का भौगोलिक परिचय



 भारत विश्व का अकेला देश है जिसका नाम हिंद महासागर से जुड़ा है ।


 आकृति स्थिति एवं विस्तार


भारत की आकृति चतुष्कोणीय है।



 अक्षांश की दृष्टि से भारत उत्तरी गोलार्ध का देश है तथा देशांतर की दृष्टि से पूर्वी गोलार्ध के मध्य में है ।

 इसका विस्तार दक्षिण में 8°4' से उत्तर में37°6' उत्तरी अक्षांश तथा पश्चिम में 68°7' से पूर्व में 97°25'  पूर्वी देशांतर के बीच है ।


 देश का मानक समय  82 1/2 डिग्री पूर्वी देशांतर है जो नैनी से गुजरता है यह ग्रीनविच समय से 5 घण्टे30 मिनट आगे है ।

 भारतीय मानक समय से गुजरने वाले राज्य ---उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ़ , उड़ीसा एवं आंध्र प्रदेश
हैं।

  भारत का क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किलोमीटर है ।

 क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व का सातवां बड़ा देश है इसका क्षेत्रफल विश्व के क्षेत्रफल का 2.42 प्रतिशत  है।

 भारत से बड़े क्षेत्रफल वाले देश-- रूस,  कनाडा , चीन , अमेरिका , ब्राजील एवं ऑस्ट्रेलिया है ।।

 इसका विस्तार उत्तर-दक्षिण दिशा में 3214 किलो मीटर है तथा पूर्व- पश्चिम दिशा में 2933 किलोमीटर है ।

 भारत की स्थल सीमा की लंबाई 15200 किलोमीटर है , इसके मुख्य भूमि की तटीय सीमा की लंबाई 6100 किलोमीटर है , देश की कुल तटीय सीमा की लंबाई 7516.6 किलोमीटर है ।

 भारत की कुल सीमा 22716.6 किलोमीटर है ।



भारत का पड़ोसी देशों के साथ सीमा विस्तार


 भारत-बांग्लादेश---------- 4096.7 किलोमीटर

भारत ---चीन_------------------3488 किमी

भारत ---पाकिस्तान-----------3323 किमी

 भारत --- नेपाल -------------1751 किमी

भारत ----- म्यांमार ----------1643 किमी

 भारत ------ भूटान  --------- 699 किमी

भारत ----- अफगानिस्तान ------- 80 /  किमी य
 106  किमी

सीमा लगने वाले देश अवरोही क्रम में


बच्ची पाने के लिए मामा की भू ने अफरा तफरी मचा दी ।

ब -------- बाँग्लादेश
ची------ चीन
पा ------- पाकिस्तान
ने --------- नेपाल
मामा ------- म्यांमार
भू ---------- भूटान
अफरा ---- अफगानिस्तान




 भारत के अंतिम सीमा बिंदु

 दक्षिणतम ------ बिंदु इंदिरा पॉइंट ( निकोबार दीप )

उत्तरी बिंदु  - -------- इंदिरा कॉल ( जन्मू - कश्मीर )

 पश्चिम बिंदु --------- गौर माता ( गुजरात )

पूर्वी बिंदु --------- किबिथु  (अरुणाचल प्रदेश )


 मुख्य भूमि का दक्षिणतम सीमा --- कन्याकुमारी (तमिलनाडु )



     पड़ोसी देशों की सीमा पर स्थित भारतीय राज्य


(1)   चीन ---जम्मू कश्मीर  ,हिमाचल प्रदेश  , उत्तराखंड ,  सिक्किम  , अरुणाचल प्रदेश ।।



  नेपाल ---- उत्तर प्रदेश  , उत्तराखंड , बिहार , पश्चिम बंगाल ,  सिक्किम ।

(3)   बांग्लादेश  ---- पश्चिम बंगाल , असम , मेघालय , त्रिपुरा और मिजोरम ।


(4)   पाकिस्तान  ---- गुजरात , राजस्थान , पंजाब , जम्मू कश्मीर ।

शोर्ट ट्रिक -- पंगुराज

(5)   म्यांमार ----- अरुणाचल प्रदेश ,  नागालैंड , मणिपुर , मिजोरम ।


(6)  भूटान ----  सिक्किम , पश्चिम बंगाल , असम , अरुणाचल प्रदेश ।



(7)  अफगानिस्तान ---- जम्मू कश्मीर ।





        भारत के शीर्ष 5 क्षेत्रफल वाले राज्य


 राजस्थान ------- 3,42,239 वर्ग किलोमीटर

 मध्य प्रदेश -----3,08,242 वर्ग किलोमीटर

 महाराष्ट्र 3,07,713 वर्ग किलोमीटर

 उत्तर प्रदेश ---2,40,928  वर्ग किलोमीटर

जम्मू-कश्मीर ---- 2,22,236 वर्ग किलोमीटर


शोर्ट ट्रिक ---- रामम उपज

रा -------- राजस्थान
म ------- मध्यप्रदेश
म -------- महाराष्ट्र
उप --------- उतर प्रदेश
ज --------- जम्मू कश्मीर





          शीर्ष  पाँच क्षेत्रफल वाले जिले

 कच्छ  -----गुजरात ----- 45652  वर्ग किमी

 लेह  ------जम्मू-कश्मीर  ------- 43110 वर्ग किमी

 जैसलमेर -------  राजस्थान ------ 48313  वर्ग किमी

 बीकानेर ------- राजस्थान  ------ 28466 वर्ग किमी

 बाड़मेर -------- राजस्थान ------ 28 393 वर्ग किमी

शोर्ट ट्रिक ---- कलेजै बीकते हैं बाड़मेर में ।



        सिर्फ पाँच तट वाले राज्य / केंद्र शासित प्रदेश

 अंडमान निकोबार दीप ------ 1962 किमी

 गुजरात -----------     1074 किमी

आंध्र प्रदेश---------   970 किमी

तमिलनाडु ----------- 907.  किमी

महाराष्ट्र ----------------720 किमी






 प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखाएं


 भारत चीन ------- मैकमोहन रेखा ---27 अप्रैल 1914

 भारत -- पाकिस्तान ---रेडक्लिफ रेखा 15 अगस्त 1947

 भारत ------अफगानिस्तान ---डूरंड रेखा-- विभाजन पूर्व
 अब यह रेखा पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान के बीच है।




              प्रमुख चैनल

 इंदिरा पॉइंट -- इंडोनेशिया       ग्रेट चैनल

 लघु अंडमान निकोबार ----       10° चैनल

 मिनीकॉय लक्षद्वीप-------- 9 ° चैनल

 मालदीव मिनिकाय ----------  8° चैनल


 भारत-श्रीलंका ---- मन्नार की खाड़ी एवं पाक जलसंधि


 कर्क रेखा भारत के मध्य से गुजरती है,  यह 8 राज्यों से होकर गुजरती है जो हैं , गुजरात , राजस्थान , मध्यप्रदेश , छत्तीसगढ़ , झारखंड , पश्चिम बंगाल,  त्रिपुरा और मिजोरम ।


शोर्ट ट्रिक ---- राम मित्र गुछ बांझ ।

रा--------- राजस्थान
म---------- मध्यप्रदेश
मि---------- मिजोरम
त्र ------------- त्रिपुरा
गु ------------ गुजरात
छ ----------- छतीसगढ़
बां ----------- बंगाल
झ ----------- झारखण्ड


        भारत की प्रादेशिक समुद्री सीमा

 यह आधार रेखा से 12 समुद्री मील की दूरी तक है इसके उपयोग का भारत को पूर्ण अधिकार है

 समग्र क्षेत्रीय--- यह आधार रेखा से 24 समुद्री मील दूर तक है यहां भारत को सीमा शुल्क की वसूली एवं वित्तीय अधिकार प्राप्त है ।

 अनन्य क्षेत्र---  यह आधार रेखा से 200 समुद्री मील तक है  , यहां भारत को वैज्ञानिक अनुसंधान एवं प्राकृतिक संसाधन के दोहन की छूट है ।

 उच्च सागर --- अनन्य आर्थिक क्षेत्र के बाद उच्च सागर है  ,जहां सभी देशों को समान अधिकार प्राप्त हैं ।

 एक समुद्री मील  =   8 किमी



         भारत में विदेशी क्षेत्रों का समावेश

15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता के बाद फ्रांस और पुर्तगाल के अधीन कई क्षेत्रों को भारत में शामिल किया गया  ।



 पुर्तगाल के अधीन क्षेत्र

 (1) दादर एवं नगर

(2) हवेली दमन एवं दीप

 (3) और गोवा


 फ्रांस के अध्ययन क्षेत्र

 (1) चन्देरनगोर

(2) कराईकल

 (3) यनम

(4) पांडिचेरी

(5) माहे


 मई 1987 को 56 वें संविधान संशोधन द्वारा गोवा भारत का 25वां राज्य बना ।


             प्रमुख तथ्य

 भारत का वह राज्य  ,जो तीन तरफ से बांग्लादेश से घिरा है ----- त्रिपुरा

 त्रिपुरा और बांग्लादेश की सीमा कहलाती है -- शून्य रेखा

 पाकिस्तान से लगे भारत के किस राज्य की सीमा सबसे लंबी है  -----जम्मू कश्मीर (1225 कि मी)



 भारतीय उपमहाद्वीप में शामिल देश हैं , भारत , पाकिस्तान , बांग्लादेश , नेपाल  एवं भूटान ।


 भारत का दक्षिणतम बिंदु स्थित है-- 6 °4 ' उत्तरी अक्षांश पर

 भारतीय राज्यों की संख्या जो पड़ोसी देशों की सीमाओं से जुड़े हैं  --- 17 राज्य

 भारत का अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार क्रमशः है---  29°2' एवं 29°18'

 पांडिचेरी केंद्र शासित क्षेत्र में सम्मिलित है---  माहे ,  कराईकल , पांडिचेरी  , यानम ।

 मरकत द्वीप के नाम से जाना जाता है ---  अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह


 भारतीय संघ में शामिल राज्य एवं केंद्र शासित क्षेत्रों की संख्या क्रमशः--  29 और 7

 भारत के पूर्वोत्तर राज्य जिनकी सीमाएं बांग्लादेश से नहीं मिलती --- ----नागालैंड  ,मणिपुर , अरुणाचल प्रदेश  , सिक्किम ।

 मेक मोहन रेखा चीन और भारत के किस राज्य के बीच है ----- अरुणाचल प्रदेश

 इंदिरा पॉइंट की विषवत रेखा से दूरी ---- 876 कि मी

 भारत के शीर्ष पांच तटरेखा वाले राज्य ---- गुजरात  आंध्र प्रदेश  ,तमिलनाडु  ,महाराष्ट्र , केरल  ।

 नेपाल भूटान एवं चीन की सीमाओं से मिलने वाला भारतीय राज्य  ----- सिक्किम

 पूरे भारत का अक्षांशीय विस्तार ---6°4 से 37°6 उत्तरी अक्षांश ।

Monday, 4 September 2017

प्राचीन भारत का इतिहास by bajrang Lal


प्राचीन भारत का इतिहास


इसके स्रोतों को चार भागों में विभाजित किया जा सकता है ।



(1).  धर्म ग्रन्थ

(2).  साहित्यक स्रोत

(3).  पुरातत्विक स्रोत

(4)   विदशियों व्दारा विवरण




               धार्मिक ग्रन्थ स्रोत


ब्राह्मण साहित्य ---- ऋग्वेद  , सामवेद ,  यजुर्वेद एवं  अथर्ववेद  , ब्राह्नण , आरण्यक , उपनिषद , महाभारत , रामायण , पुराण ।

बौध्द साहित्य ----- विनयपिटक , सुतपिटक , अभिधम्मपिटक , महावंश , दीपवंश , ललित विस्तार , दिव्यावदान , बुध्दचरित , (अश्वघोष ) , महाविभाष ,  जातक आदि ।

जैन साहित्य --- कल्पसूत्र , भगवती सूत्र ,  आचारांग सूत्र  आदि ।



     ऐतिहासिक साहित्य स्रोत


राजतरंगिणी ( कल्हण ) , पृथ्वीराज रासो ( चन्द्रबरदाई ) , हर्षचरित ( बाणभट्ट ) , मुद्राराक्सस ( विशाखादत्त ) , अर्थशास्त्र ( कौटिल्य ) , अभिग्यानशाकुन्तलम् ( कालिदास ) , स्वप्नवासवदत्ता ( भास) ।


                राजाओं व्दारा रचित साहित्य


हाल ( सातवाहन ) ----  गाथा सप्तशती

महेन्द्रवर्मन ( पल्लव ) -----  मत्विलास प्रहसन

हर्षवर्धन  -------  रत्नावली , नागानन्द , प्रियदर्शिका

सोमेश्वर ( चालुक्य ) ------ मान्सोल्लास



साहित्यक स्रोत ग्रन्थ       :  प्रमुख तथ्य


महावंश व दीपवंश --- दक्सिणी बौध्द मत ग्रन्थ हैं।

ललित विस्तार  की रचना नेपाल में हुई थी  ।

पाणिनी ने संस्कृत व्याकरण अष्टाध्यायी की रचना की थी  ।

पतंजलि ने महाभाष्य की रचना की , जो कि पाणिनी की अष्टाध्यायी पर आधारित है ।




                  विदेशियों व्दारा विवरण

**यूनानी लेखक **

(1) हेरोटोडस : हेरोटोडस को इतिहास का पिता कहा जाता है ।  इन्होने हिस्टोरिका नामक पुस्तक की रचना की  ।


(2)  मेगास्थनीज : मेगास्थनीज ने इण्डिका की रचना की ।

(3)  अग्यात लेखक : इश्वी सन् की पहली सदी में भारतीय बंदरगाहों , प्राकृतिक स्थिति व व्यापार पर प्रकाश अपनी रचना -- पेरीप्लस आफ द एरिथ्रियन सी में दिया गया है ।

(4)  टोलेमी : टोलेमी का ज्योग्राफी प्राचीन भारतीय भूगोल एवं वाणिज्य की जानकारी देती है ।

(5)  स्ट्रेबो : स्ट्रेबो ने नेगास्थनीज के विवरण को काल्पनिक माना है ।



**रोमन लेखक **

प्लिनी :  प्लिनी ने नेचुरलिस हिस्टोरिका भारत एवं इटली के बीच होने वाले व्यापारिक संबंधों की जानकारी देता है ।


**चीन विवरण **


(1)  फाह्यान : यह चन्द्रगुप्त व्दितीय के काल में भारत आया , उसने (फू -को -की ) की रचना की , जिसमें गुप्त काल में भारत के सामाजिक ,आर्थिक व धार्मिक स्थिति पर प्रकाश डाला ।

(2)  ह्येन सांग : यह हर्षवर्धन के समय 629 ईश्वी में भापत आया ,( सी - यू- की)  की रचना की ।

(3)  इत्सिंग : यह सातवीं शताब्दी में भारत आया तथा नालन्दा एवं विक्रमशिला का वर्णन किया ।



*** अरबी लेखक ***



(1)  सुलेमान : वह 9वीं शताब्दी में भारत आया तथा  पाल एवं प्रतिहार शासकों के बारे में लिखा ।

(2)  अलबरुनी : अलबरुनी ने तहकीक-ए-हिन्द की रचना की , जिसमें भारत के निवासियों की दशा का वर्णन किया है ।

पुरातात्विक स्रोत


पुरातात्विक स्रोतों में अभिलख , सिक्के , ( मुहर) , स्मारक , मूर्तियाँ , चित्रकला , भौतिक , अवशेष , मृदभाण्ड , आभूषण आदि आते हैं।


                शब्दावली

अभिलेख -- जो लेख मुहर , प्रस्तरस्तम्भों , स्तूपों , चट्टानों  और ताम्रपत्रों पर मिलते हैं।

एपिग्राफी --- अभिलेख के अध्ययन को पुरालेखाशास्त्र ( एपिग्राफी ) कहते हैं।

पेलिओग्राफी ----- अभिलेख तथा दूसरे प्राचीन दस्तावेजों की प्राचीन तिथी के अध्ययन को पुरालिपिशास्त्र कहते हैं।

न्यूमिस्मेटिक्स ----- सिक्कों के अध्ययन को मुद्राशास्त्र ( न्यूमिस्मेटिक्स ) कहते हैं।



        (1)    सिक्के

भारत के प्राचीन सिक्के पंचमार्क या आहत सिक्के कहलाते थे । साहित्य में इन सिक्कों को कार्षापण कहा गया है।

पुराने सिक्रे तांबे , चांदी , सोने , और सीसे के बनते हैं।

आरम्भिक सिक्कों में कुछ प्रतीक मिलते थे , परन्तु बाद में सिक्कों पर राजाओं और देवताओं के नाम तथा तिथियाँ उल्लिखित मिलती थी ।


सोने के लिखित सिक्के सर्वप्रथम कुषाण राजाओं ने जारी किए थे ।

गुप्त शासकों ने सबसे अधिक सोने के सिक्के जारी किए ।

समुद्रगुप्त को एक सिक्के पर वीणा बजाते हुए दिखाया गया है ।

सातवाहनों ने सीसे के सिक्के जारी किए ।

गुप्तकाल में स्वर्ण सिक्कों को दीनार एवं चांदी के सिक्कों को रुपक कहते हैं।



        (2)  अभिलेख

सबसे अधिक अभिलेख मैसूर संग्रहालय में संगृहीत हैं।

मौर्य , मौर्योतर और गुप्त काल के अधिकांश अभिलेख कार्पस इन्सक्रिप्शनम इंडिकेरम नामक ग्रन्थ में संकलित हैं।



      अभिलेखों की लिपियाँ

(1)  प्राकृत लिपि --- आरम्भिक अभिलेख प्राकृत  भाषा में हैं।

(2)  ब्राह्मी लिपि ----- यह लिपि बाँए से दाँए लिखी जाती थी , अशोक के शिलालेख ब्राह्मी लिपि में हैं।

(3)  खरोष्ठी लिपि ---- यह लिपि दाँए से बाँए लिखी जाती थी , अशोक के कुछ शिलालेख खरोष्ठी लिपि में हैं।


(4)  यूनानी एवं अरमाइक लिपि ---- पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान में अशोक के शिलालेखों में इन लिपियों का प्रयोग हुआ है ।

1837  में जेम्स प्रिंसेप  इन अभिलेखों को पढने वाला पहला विदेशी था ।




     महत्वपूर्ण अभिलेख एवं उनके शासक

समुद्रगुप्त. --------             प्रायग प्रशस्ति ( इलाहाबाद)
, एरण अभिलेख ( सागर म प्र )

रुद्रदामन ----------       जूनागढ़ अभिलेख ( गुजरात)

स्कन्दगुप्त -------------- भीतरी स्तम्भ लेख ( गाजीपुर)

खारवेल -------_           हाथीगुम्फा अभिलेख

पुलकेशिन 2nd------  ऐहोल अभिलेख

राजा भोज -------- ग्वालियर प्रशस्ति ( म प्र )

विजयसेन -------- देवपाड़ा अभिलेख

हर्षवर्ध्दन  -------- मधुवन एवं बासखेड़ा अभिलेख

यशोधर्मन ----_-------- मंदसौर प्रशस्ति

गौतमीबलश्री -------- नासिक अभिलेख


याद रखने की ट्रिक


ऐ. ,  प्रयाग का समुद्र  , जून का दामन ।

भीतरी सकरगन्द , हाथी की खाल ।

पुल का हाल , राजा बना ग्वाला ।

देवों की विजय , बास का मधुवन वृध्दि करे ।

यश मंदो ,  गौता नासा ।।



ये छोटी सी कविता याद करनी होगी


अभिलेख : विशिष्ट तथ्य

रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख संस्कृत भाषा में जारी प्रथम अभिलेख माना जाता है ।

पुलकेशिन व्दितीय का एहोल अभिलेख उसके दरबारी कवि रविकीर्ति व्दारा रचित है ।

अशोक के प्रयाग स्तम्भलेख में कारुवाकी , एवं तीवर का उल्लेख मिलता है ।

समुद्रगुप्त के प्रयाग प्रशस्ति की रचना उसके संधि विग्रहक हरिषेण ने की थी ।

भानुगुप्त के एरण अभिलेख में सर्वप्रथम सती प्रथा का लिखित साक्ष्य प्राप्त होता है ।

चन्द्रगुप्त 2nd के उदयगिरि गुहा लेख के अनुसार उसका उदेश्य सम्पूर्ण पृथ्वी को जीतना था ।

तुमुन अभिलेख में कुमारगुप्त 1st को शरदकालीन सूर्य का तरह बताया गया है ।

स्कन्दगुप्त के भीतरी अभिलेख में हुणों के आक्रमण का उल्लेख मिलता है ।

मंदसौर अभिलेख में यशोधर्मन को जननेंद्र कहा गया है ।

चन्द्रगुप्त 2nd विजयों का वर्णन मेहरौली लौहस्तम्भ लेख में मिलता है ।



            विदेशी अभिलेख

(1). बोगाज कोई ---- मध्य एशिया से 1400 ई पू में प्राप्त संधि पत्र अभिलेख में वैदिक देवता मित्र ,  वरुण , इन्द्र और नाशत्य के नाम उल्लिखित हैं।


(2)  हेलियोडोरस ( यूनानी राजदूत ). का बेसनगर का गरुड़ लेख ,  भागवत धर्म की जानकारी देता है ।




प्राचीन भारतीय इतिहास के आधुनिक लेखक


1776 में मनुस्मृति का अंग्रेजी अनुवाद ए कोड ओफ जेन्टू लोज के नाम से कराया गया ।

सर विलियम जोन्स ने 1789  में अभिग्यानशाकुंतलम का अंग्रेजी में अनुवाद किया ।

विल्किन्स ने 1785 में भगवतगीता का अंग्रोजी मेम अनुवाद किया ।

विसेन्ट आर्थर स्मिथ की पुस्तक अर्ली हिस्ट्री ओफ इंडिया में प्राचीन भारत का सुव्यवस्थित इतिहास प्रस्तुत किया गया है ।

ब्रिटिश इतिहासकार ए एल बैशम ने वंडर दैट वाज इंडिया लिखी ।

 डी डी कौसंबी की कृति एन इन्ट्रोडक्शन टू द स्टडी ओफ इंडियन हिस्ट्री , प्राचीन भारतीय इतिहास जानने का एक उतम स्रोत है ।







           महत्वपूर्ण रचनाएँ एवं लेखक

विग्यानेश्वर ----- ------- मिताक्षरा

कालिदास ------ अभिग्यानशाकुंतलम , माल्विकाग्निमित्रम  , रघुवंश

विशाखादत ------ मुद्राराक्षस , देवीचन्द्रगुप्त

शूद्रक --------- मृच्छकटिकम

वात्स्यायन ----- कामसूत्र

बाणभट्ट ------ हर्षचरित

सोमदेव -------  ललितविग्रहराज

भास्कराचार्य ------ सिध्दांत शिरोमणि

नागसेन ------- मिलिन्द पान्हो

जयदेव -------  गीतगोविन्द

भास -------  चारु दत्त , स्वप्न वासवदत्ता

विष्णु शर्मा ------  पंचतंत्र

अश्वघोष -----  बुध्द चरित , सूत्रालंकार

वेदव्यास -------  भगवतगीता , महाभारत

भर्तृहरि -------  शक्ति शतक

भरत --------  नाटयशास्त्र

वाल्मीकि ------ रामायण

तुलसीदास ------  रामचरितमानस

माघ ----------  शिशुपालवध

सुश्रुत ----- सुश्रुत संहिता

नागार्जुन ------ शतसहस्रिका

प्रस्तर युग by bajrang Lal

प्रस्तर युग : आदिम मानव


प्रागैतिहासिक काल वह काल है , जिसके लिए कोई लिखित सामग्री उपलब्ध नहीं है ।


मनुष्य के विकास के आधार पर मानव सभ्यता को दो भागों में बाँटा गया है -- पाषाण युग एवं धातु युग


इतिहासकारों के अनुसार इस सभ्यता का उद्-भव एवं विकास प्रतिनूतन काल हुआ ।

इस युग को तीन कालों में विभक्त किया जाता है ।

(1)  पुरापाषण युग ( पैलियोलिथिक )

(2)  मध्यपाषाण काल ( मेसोलिथिक )

(3)  नवपाषाण काल ( नियोलिथिक )



       पुरापाषाण युग

इसे तीन उप भागों में विभाजित किया जाता है

(a)  निम्न पुरापाषाण काल ( 500,000 ई पू से 50,000 ई पू )

इस काल में मानव जीवन अस्थिर था  ।

इसी काल में अग्नि का आविष्कार हुआ  ।

मानव समूहों में शिकार कर अपना भोजन संग्रह करता था ।


मुख्य औजार --- कुल्हाड़ी या हस्त कुठार , विदारणी , खंडक  ।


( b)  मध्य  पुरापाषाण काल (50,000 से 40,000 ई पू )

अग्नि का प्रयोग व्यापक पैमाने पर किया जाता था  ।

इस काल को फलक संस्कृति भी कहते हैं।

इस काल में पत्थर के गोले से वस्तुओं का निर्माण हुआ  ।



(c)  उच्च पुरापाषाण काल ( 40,000 से 10,000 ई पू )

इस काल की दो प्रमुख विशेषताएं थी

(a) नए चमक उध्योग

(b)  आधुनिक मानव का उदय

सबसे पुरानी चित्रकारी के प्रमाण ( भीमबेटका ) इसी काल के हैं।


प्रमुख औजार --- फलक एवं तक्स्हणी , शल्क ।





(2) मध्यपाषाण काल ( 9,000 से 4,000 ई पू )

आदमगढ़ एवं बागोर में पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुए ।

इस काल में सूक्ष्म पाषाण फलक का उध्योग था ।


मुख्य औजार ---- पत्थर के छोटे औजार ।



(3)  नवपाषाण काल ( 7,000 से 2500  ई पू )

इस काल में मानव ने खेती करना  प्रारम्भ  किया ।



प्रमुख औजार --- पोलिशदार पत्थर के औजार , मुख्यतः पत्थर की कुल्हाड़ियाँ , हड्डियों के औजार ।






नवपाषाण काल : विशिष्ट तथ्य

मेहरगढ़ से गेहूँ व जौ की खेती तथा भेड़ एवं बकरी पालन प्रारम्भ करने के साक्ष्य मिलता है ।

कोलडिहवा से विश्व में चावल का प्राचीनतम साक्ष्य ( लगभग 6,000 ई पू ). प्राप्त हुआ है ।

गुफ्कराल , कश्मीर -- यहाँ के लोग पशुपालन व कृषि दोनों कार्य करते थे ।

सर्वप्रथम इसी काल में कुत्ते को पालतू बनाया गया ।

 कुम्भकारी सबसे पहले इसी काल में मिलती है।

पिकलीहल -- यहाँ के निवासी पशुपालक थे ।  यहाँ पर राख के ढेर एवं निवास स्थान दोनों मिले हैं।

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